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प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना पर उठे सवाल, फिक्स्ड चार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा भार वेंडरों और बिजली विभाग के चक्कर काट रहे लोग

रामपुरा - (मुकेश राठौर) प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों पर सोलर पैनल लगवाने वाले कई उपभोक्ता अब खुद को असमंजस और परेशानी की स्थिति में पा रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं को सोलर लगने के बाद बिजली बिल में राहत मिलने की उम्मीद थी, उन्हें पहले ही महीने 600 से 900 रुपये तक के बिल थमा दिए गए हैं। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि सोलर लगवाने से पहले उनका मासिक बिजली बिल 500 से 600 रुपये के बीच आता था, लेकिन 3 किलोवाट का सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद भी फिक्स्ड चार्ज और अन्य मदों के नाम पर 850 रुपये तक का बिल आ गया। ऐसे में लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि वे सोलर की डाउन पेमेंट और किस्त भरें या फिर बिजली का बिल जमा करें। नगर के सोलर लगा चुके उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने सरकार की योजना के तहत घर पर सोलर लगवाया था। उम्मीद थी कि बिजली बिल में राहत मिलेगी, लेकिन पहला ही बिल करीब 850 रुपये का आ गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वेंडर और बिजली विभाग से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिला। रामपुर नगर के परसराम प्रजापति भी बताया कि उन्होंने पीएम सूर्य घर योजना के तहत 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगवाया था, लेकिन बिल आने के बाद वे भी हैरान हैं। उनका कहना है कि योजना के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई और अब उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। क्या कहता है बिजली विभाग? इस विषय में बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई उपभोक्ताओं ने सोलर प्लांट लगाने के साथ ही अपने घर का बिजली लोड 1 किलोवाट से बढ़ाकर 3 किलोवाट कराया है। इसी कारण शुरुआती एक-दो महीनों तक फिक्स्ड चार्ज और अन्य शुल्कों के कारण बिल आ सकता है। अधिकारियों के अनुसार, आगामी महीनों में स्थिति सामान्य होने पर बिल में कमी दिखाई दे सकती है। वेंडरों पर भी उठ रहे सवाल उपभोक्ताओं का आरोप है कि सोलर वेंडर योजना के फायदे तो बताते हैं, लेकिन लोड वृद्धि, फिक्स्ड चार्ज, नेट मीटरिंग प्रक्रिया और शुरुआती बिलों से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं देते। परिणामस्वरूप उपभोक्ता बाद में खुद को भ्रमित और ठगा हुआ महसूस करते हैं। जनता की मांग स्थानीय उपभोक्ताओं ने मांग की है कि बिजली विभाग और सोलर वेंडर संयुक्त रूप से शिविर लगाकर लोगों को योजना की वास्तविक जानकारी दें तथा फिक्स्ड चार्ज और अन्य शुल्कों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें, ताकि उपभोक्ताओं में व्याप्त भ्रम दूर हो सके।

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