जाट - (सत्यनारायण सुथार) जावद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जाट-ग्वालियर-लक्ष्मीपुरा नवीन सड़क मार्ग पर निर्माण कार्य में बरती जा रही गंभीर लापरवाही के कारण ग्रामीणों और किसानों का जीना दूर्भर हो गया है।निर्माण कम्पनी के ठेकेदार की मनमानी के चलते एक निर्माणाधीन पुलिया न केवल किसानों के लिए आपदा बन गई है,बल्कि राहगीरों के लिए भी मौत का जाल साबित हो रही है। *क्या है पूरा मामला?* क्षेत्रवासियों के अनुसार करीब दो महीने पहले लॉटनी नदी के समीप पुरानी पूलिया को तोड़ा गया था। निर्माण करने वाली कंपनी के ठेकेदार ने गंभीर लापरवाही बरतते हुए बिना पाइप डाले ही आधी अधूरी पुलिया को मिट्टी से पाट दिया गया, जिसके कारण नाले का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया।बीती रात हुई तेज बारिश का पानी निकासी न होने के कारण सीधा किसानों के खेतों में जा घुसा, जिससे खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। और उपजाऊ मिट्टी का कटाव हो रहा है। *ट्रेलर धंसने से थमा आवागमन-* लापरवाही की हद तब पार हो गई जब शुक्रवार सुबह ईंटों से भरा एक ट्रेलर गाड़ी नंबर RJ09 GB9879 जाट से गोल डूंगरी जाते समय इसी अधूरी पुलिया पर मिट्टी में धंस गया।गनिमत रही कि चालक की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना के बाद मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। *किसानों का दर्द- "नहीं सुनी जा रही गुहार"-*पीड़ित किसान मोहम्मद इसाक जयपुरी लोहार ने बताया कि उन्होंने कई बार ठेकेदार से कार्य पूरा करने और जल निकासी की व्यवस्था करने का आग्रह किया,लेकिन उनकी अनसुनी कर दी गई।पिछले "दो महीने से काम बंद पड़ा है। नाले का पानी अब मेरे खेत से होकर गुजर रहा है, जिससे न केवल मेरी जमीन की उर्वरक मिट्टी बह रही है,बल्कि मुझे भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।" *ग्रामीणों में गहरा आक्रोश,प्रशासन से की मांग-* स्थानीय ग्रामीणों ने ठेकेदार पर लापरवाही और सुस्त रवैये के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने और अधूरा निर्माण छोड़ देने के कारण आए दिन इस मार्ग पर हादसे हो रहे हैं। तत्काल प्रभाव से अधूरी पुलिया का निर्माण कार्य पूरा किया जाए, जल निकासी के लिए उचित पाइप और व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, लापरवाह ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके, एवं पुलिया के आसपास के किसानों को और अधिक नुकसान होने से बचाया जा सके