डीकैन - (संजय जैन) आधुनिकता के इस दौर में जहाँ परंपराएँ लुप्त होती जा रही हैं, वहीं डीकैन नगर आज भी अपनी वर्षों पुरानी अनूठी परंपराओं को जीवंत रखे हुए है। यहाँ की आपसी सद्भावना का नजारा धुलेंडी की रात को तब देखने को मिला, जब जैन और माहेश्वरी समाज ने एक साथ मिलकर 'संयुक्त ढूंढ' का आयोजन किया। ढोल की थाप और 'होली है' की गूँज धुलेंडी की रात्रि में दोनों समाजों के लोग स्थानीय हनुमान चौक पर एकत्रित हुए। यहाँ से उत्साह और उमंग का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने पूरे नगर को सराबोर कर दिया। ढोल-धमाकों की थाप और "होली है" के जयघोष के साथ जुलूस निकाला गया। समाज जनों ने जैन और माहेश्वरी समाज के प्रत्येक घर जाकर होली की शुभकामनाएं दीं और ढूंढ उत्सव मनाया। भक्ति के साथ हुआ समापन नगर भ्रमण के पश्चात, ढूंढ में शामिल सभी परिवार और समाज जन ढोल-ताशों के साथ ओंकारेश्वर मंदिर पहुँचे। यहाँ भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से आरती की गई। अंत में सभी को प्रसाद वितरण किया गया। "डीकैन की यह विशेषता रही है कि यहाँ जैन और माहेश्वरी समाज सदैव एक होकर सभी धार्मिक और सामाजिक आयोजन मनाते हैं। यह संयुक्त ढूंढ भी उसी अटूट एकता और प्रेम का प्रतीक है।" यह आयोजन न केवल परंपरा का निर्वहन था, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए सामाजिक समरसता का एक बड़ा संदेश भी था।