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अव्यवस्थाओं की मार:- डीकैन PHC में ‘जननी एम्बुलेंस’ का अभाव, रिकॉर्ड तोड़ डिलीवरी के बावजूद निजी वाहनों के भरोसे गर्भवती महिलाएं

डीकैन (संजय जैन) | शासन की जननी सुरक्षा योजना कागजों पर तो दौड़ रही है, लेकिन जावद तहसील के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) डीकैन में यह धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। एक ओर जहाँ अस्पताल के स्टाफ ने अपनी मेहनत से प्रसव के आंकड़ों में रिकॉर्ड वृद्धि की है, वहीं दूसरी ओर खुद की 'जननी एम्बुलेंस' न होने के कारण यह सफलता अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ रही है। महंगी प्राइवेट गाड़ियां और घंटों का इंतजार डीकैन और आसपास के दर्जनों गांवों की गर्भवती महिलाओं के लिए सरकारी एम्बुलेंस का अभाव एक बड़ी मुसीबत बन गया है। हालात इतने खराब हैं कि रेफरल में जोखिम गंभीर स्थिति में मरीजों को जिला चिकित्सालय ले जाने के लिए समय पर सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं होता। आर्थिक बोझ:- गरीब परिवारों को मजबूरी में निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें भारी-भरकम किराया चुकाना पड़ रहा है। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा:- डिलीवरी के बाद प्रसूताओं को घर जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे संक्रमण और स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा बना रहता है। उपलब्धियां अनेक, पर संसाधनों की कमी हैरानी की बात यह है कि संसाधनों के अभाव के बावजूद डीकैन PHC का प्रदर्शन सराहनीय रहा है। मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोहम्मद जासिम ने बताया कि पिछले दो वर्षों में इस केंद्र को 'नॉन-फंक्शनल' से 'फंक्शनल' डिलीवरी पॉइंट बनाया गया है। लक्ष्य से अधिक कार्य:- पिछले वर्ष 120 डिलीवरी के लक्ष्य के मुकाबले 122 प्रसव कराए गए। वहीं, इस वर्ष समाप्ति के एक माह पूर्व ही 183 सुगम डिलीवरी करवाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है। बेहतर ओपीडी: अस्पताल में हाई-रिस्क प्रेगनेंसी चेकअप, टीबी डायग्नोसिस और बीपी-शुगर मरीजों की नियमित काउंसलिंग के कारण ओपीडी में लगातार वृद्धि हुई है। जिम्मेदारों का पक्ष क्षेत्रीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण मरीजों को तड़पना पड़ रहा है। इस संबंध में डॉ. जासिम ने स्वीकार किया कि "108 एवं जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस की कमी से मरीजों को परेशानी होती है। हमने इस समस्या और बढ़ते वर्कलोड के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार अवगत कराया है ताकि स्थायी एम्बुलेंस की व्यवस्था हो सके।" अब देखना यह है कि रिकॉर्ड तोड़ काम कर रहे इस स्वास्थ्य केंद्र को विभाग एम्बुलेंस की सुविधा कब मुहैया कराता है, या ग्रामीण इसी तरह निजी वाहनों के बोझ तले पिसते रहेंगे।

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