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रतनगढ नगर समस्या एवं सुझाव ग्रुप द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवियों ने देर रात्रि तक छेड़ी हास्य की रंगीन फूलझड़िया ख्याति प्राप्त कवि स्व.श्री श्याम पाराशर रतनगढ की पुण्य स्मृति में रंग तेरस पर हुआ हास्य कवि सम्मेलन का शानदार आयोजन

रतनगढ़ - रंग तेरस पर्व के अवसर पर रतनगढ़ नगर समस्या एवं सुझाव ग्रुप के तत्वावधान में मालवी भाषा के अखिल भारतीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कवि स्वर्गीय श्री श्याम जी पाराशर की पुण्य स्मृति में स्थानीय झंडा चौक परिसर रतनगढ़ में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।जिसमें ख्याति प्राप्त कवियों के द्वारा देर रात्रि तक अपने काव्य पाठ के माध्यम से हास्य की रंगीन फुलझड़िया छोड़कर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।लगभग 3 घंटे से भी अधिक समय तक चले बहुत ही कम या यू कहे कि नाममात्र के बजट के हास्य कवि सम्मेलन के दौरान कवियों ने श्रोताओं को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया।आपको बता दें कि उक्त आयोजन में नगर समस्या एवं सुझाव ग्रुप के राजेश लढा,शब्बीर भाई बोहरा,ओमप्रकाश मूंदड़ा, हरीश माली,भोपाल सिंह राजपूत,शंकर व्यास, सुनिल बंजारा,गोपाल अग्रवाल, सुरेश मंडोवरा प्रभात,पिंकेश मंडोवरा,शिवनंदन छिपा, बनवारी लाल सोनी,श्याम सुंदर प्रजापत,राहुल तावड़, बृजमोहन पाराशर, मुजीब पठान,हिम्मत जैन,डॉ.राजेश सोलंकी, राजेंद्र मूंदड़ा,शिव बैरागी,नितिन मारू, सत्यनारायण तिवारी, मोनू सोनी,सारिक पठान,राजू भाई पठान,शौकीन सोनी, गोपाल राठौर,श्याम पुष्प पाराशर,हरिओम भाटी,सोनू बाहेती आदी के विशेष सहयोग से आयोजित किया गया था।कवि सम्मेलन के दौरान सर्वप्रथम सभी कवियों के द्वारा मां शारदे की पूजा अर्चना व दिप प्रज्वलन के साथ शुरुआत की गई। *सब्जियों की बनी विशेष माला से किया कवियों का स्वागत सत्कार* आयोजन समिति के राजेश लढा, ओम प्रकाश मूंदड़ा,शिवनंदन छिपा, गोपाल अग्रवाल, शब्बीर भाई बोहरा, कंवरलाल मीणा,बनवारी लाल सोनी, श्याम सुंदर प्रजापत,श्रीमती संगीता ईनाणी, ओमप्रकाश बाहेती, जितेंद्र टेलर,उमेश व्यास आदि के द्वारा विशेष रूप से बनाई गई आलू, बैंगन,प्याज, मिर्ची, भिण्डी आदी सब्जियों की माला एवं टोपी पहनाकर सभी कवियों का स्वागत सत्कार किया गया।इस दौरान स्थानीय युवाओं के द्वारा भी कवि सम्मेलन के सूत्रधार स्थानिय कवि झुम्मक लाल सोनी का माला पहनाकर सम्मान किया गया। इस दौरान मनासा से आए दादा आशु कवि भेरू सुनार की रचना "कौन बुझाता प्यास आसमान से यदि बदलिया नहीं होती,और वह घर-घर नहीं खंडहर हो जाया करते हैं।जिनमे बेटियां नहीं होती"व भरी जवानी में शीला को हाथ अगर पीलो नी होतो,तो वीके बाप को मुंडो कारो वे जातो, केकड़ी से आए कवि कमलेश शर्मा ने मारी लुगाई ने निर्विरोध वार्ड मेंबर बना दी ने भरपूर दाद बटोरी।बनेड़ा से आए हास्य कवि मुकेश चेचाणी ने हास्य रचना "एक जणा का जिमवा का न्योता में वो ही जावे,जो घर में सबसे ज्यादा खावे",ने श्रोताओं को खूब हंसाया।कवि सम्मेलन के दौरान उज्जैन से आई कवियित्री निशा उज्जैयिनी एवं दादा आशु कवि भेरू सुनार के बीच चली तीखी नोंकझोक ने उपस्थित श्रोताओं को हंसा- हंसा कर लोटपोट कर दिया।भीलवाड़ा से आए कवि संजीव सजल ने अपनी कविता "हो सके तो जाति- पाति मजहब छोड़कर, हिंदुस्तानी बनकर हिंद की ही बात कीजिए" के माध्यम से देश भक्ति व कोमि एकता का अच्छा संदेश दिया।कवि सम्मेलन के सूत्रधार स्थानीय युवा कवि झुम्मक लाल सोनी ने अपनी चिर परिचित शैली में काव्य पाठ के माध्यम से सभी को खूब गुदगुदाया।समस्त कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे अजय हिंदुस्तानी बेगू ने बीच -बीच में शानदार हास्य व्यंग से श्रोताओ का भरपूर मनोरंजन किया।समस्त कार्यक्रम का संचालन एवं आभार निर्मल मूंदड़ा के द्वारा व्यक्त किया गया।

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