सरवानिया महाराज - जावद तहसील की ग्राम पंचायत मडावदा अंतर्गत ग्राम रानपुर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में सोमवार को मधुमक्खियों के भीषण हमले के दौरान बच्चों की जान बचाते हुए आंगनवाड़ी रसोइया श्रीमती कंचनबाई पति शिवलाल मेघवाल ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका यह अद्भुत साहस न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे समाज के लिए कर्तव्य, साहस और मानवता की अमिट मिसाल बन गया है। ग्राम रानपुर में आंगनवाड़ी केंद्र और प्राथमिक विद्यालय एक ही परिसर में संचालित होते हैं। घटना के समय केंद्र में लगभग 20 छोटे बच्चे मौजूद थे। साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका गुणसागर जैन व मंगला मालवीय भी उपस्थित थीं। मध्यान्ह भोजन बच्चों को खिलाकर पानी पिलाया रहा था। तभी अचानक मधुमक्खियों के एक बड़े झुंड ने परिसर पर हमला कर दिया। देखते ही देखते पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और बच्चे घबराकर इधर-उधर भागने लगे। बच्चों को बचाने के लिए खुद बनीं ढाल - संकट की इस घड़ी में कंचनबाई मेघवाल ने अद्वितीय साहस का परिचय दिया। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए बच्चों को कंबल से ढककर सुरक्षित किया और एक-एक कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर बाहर निकालती रहीं। इस दौरान मधुमक्खियों ने उन पर लगातार हमला किया और वे दर्जनों डंक का शिकार हो गईं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अंतिम क्षण तक बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की। घटना में एक तीन वर्षीय बालक को भी मधुमक्खी ने काट लिया, जिसे प्राथमिक उपचार दिया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले टूट गई सांस - घटना की जानकारी मिलते ही दिलीप मेघवाल सबसे पहले मौके पर पहुंचे और 112 पर सूचना दी। सरवानिया चौकी से डायल 112 के पायलट राजेश राठौर एवं आरक्षक कालू नाथ योगी घायल कंचनबाई को तत्काल सरवानिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कंचनबाई की शहादत की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जर्जर स्कूल भवन बना बच्चों के लिए खतरा - गौरतलब है कि ग्राम रानपुर में प्राथमिक विद्यालय संचालित तो है, लेकिन विद्यालय की पूरी इमारत अत्यंत जर्जर एवं क्षतिग्रस्त अवस्था में है। भवन असुरक्षित होने के कारण कई बार बच्चों को पास ही स्थित खाकर देव महाराज मंदिर परिसर में बैठाकर पढ़ाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय भवन की खराब स्थिति और परिसर की अव्यवस्था भी इस तरह की दुर्घटनाओं को न्योता दे रही है। घटना के बाद शिक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ - कंचनबाई मेघवाल अपने परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य थीं। उनके पति शिवलाल मेघवाल पिछले तीन वर्षों से लकवाग्रस्त हैं। उनके तीन बच्चे—रवि, वर्षा और चंदा हैं। परिवार में एक बहू एवं एक बेटी गर्भवती है। कंचनबाई के असामयिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और वे गंभीर आर्थिक संकट में आ गए हैं। बीमा और मुआवजे की उठी मांग - इस हृदयविदारक घटना के बाद महिला स्वयं सहायता समूह संघ, मध्यप्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती माया–मनोहर बैरागी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि आंगनवाड़ी एवं स्कूलों में कार्यरत महिला रसोइयों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये का निशुल्क बीमा एवं दुर्घटना की स्थिति में तत्काल मुआवजा नीति लागू की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े। क्षेत्र में शोक, श्रद्धांजलि और न्याय की मांग - घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों ने कंचनबाई मेघवाल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें सच्ची कर्मवीर नारी बताया। साथ ही शासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, सरकारी नौकरी एवं आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की गई है। कंचनबाई मेघवाल का यह बलिदान सदैव याद रखा जाएगा- "एक ऐसी नारी, जिसने बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी।"