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जयस संगठन के नेतृत्व में आदिवासी समाज के हेमराज पर हुए झूठे प्रकरण के विरोध में वनविभाग का घेराव, न्याय की मांग को लेकर अड़े रहे संगठन के लोग।

आज जयस से जुड़े लोग बड़ी संख्या में वनविभाग के जिला कार्यालय पहुंचे और विरोध जताया, संगठन से जुड़े लोग ने बताया कि वन परिक्षेत्र जावद के वन क्षेत्र में दिनांक 22.01.2026 को एक वन्यप्राणी तेन्दुआ घायल अवस्था में मिला जिसकी पीठ में गोली लगी हुई थी। वन परिक्षेत्राधिकारी जावद एवं उपवनमण्डलाधिकारी नीमच द्वारा उक्त तेन्दुए को मात्र घायल बता कर प्रकरण खत्म करने का प्रयास किया गया। किन्तु नीमच क्षेत्र के जागरूक न्यूज मिडिया के दबाव की वजह से प्रकरण मे उक्त अधिकारियों द्वारा बाद में स्वीकार किया गया कि तेन्दुए की कमर में गोली लगी है। जिसके फलस्वरूप मिडिया के दबाव में प्रभारी उपवनमण्डलाधिकारी नीमच द्वारा सर्च वारंट जारी कर दिनांक 24.01.2025 की शाम 07 बजे ग्राम तरोली तहसील सिंगौली नीमच से हेमराज पिता रत्ता भील के घर दबिश दी गयी तथा हेमराज को तेन्दुए के शिकार मे अपराधी बनाया गया। जबकि वन विभाग में वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 50(8) के तहत सर्च वारंट जारी करने का अधिकार सहायक वन संरक्षक या उससे ऊपर के पद के अधिकारियों को होता है। दशरथ अखण्ड मूल पद वनक्षेत्रपाल है वह सर्च वारंट जारी नहीं कर सकते है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के तहत, तलाशी, जप्ती एवं बयान के दौरान विडियोंग्राफी करना होता है, जो कि नहीं की गयी है। साथ ही बंदूक की गोली किस हथियार से चली है, इसकी पुष्टि के लिये फोरेंसिक बैलिस्टिक्स जांच की जाती है, जिसमें मुख्य रूप से बुलेट एवं बैरल का मिलान किया जाता है। फोरेंसिक बैलिस्टिक्स जांच म.प्र. में भोपाल एवं सागर की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) मे की जाती है। फोरेंसिक बैलिस्टिक्स जांच में लगभग सप्ताह भर का समय लगता है। फिर भी बिना जांच के आरोपी बना कर वन चौकी पर बिठाया रखा जबकि नियम यह कहता कि 24 घंटों में कोर्ट में पेश करना होता है। हमारी यह मांग है कि हमारा आदमी निर्दोष है जिसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए। हम यह चाहते हैं कि जब तक हमे उचित आश्वासन नहीं मिल जाता हम यही धरने पर बैठे रहेंगे।

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