उमरिया - उमरिया जिले के अंतर्गत ग्राम नरवार 29 में आयोजित सार्वजनिक नवयुवक समिति द्वारा संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण आज़ दिनांक 8 फरवरी दिन सोमवार को कथा के *छठवें में दिवस में व्यास पीठ पर आसीन पंडित श्री कृपालु महाराज जी द्वारा श्री कृष्ण विवाह उत्सव, उद्धव चरित्र, रासलीला, उद्धव गोपी संवाद, रुक्मणी चरित्र, प्रसंग का व्याख्यान किया*! उन्होंने कहा जीव और ब्रह्मा की एकता का नाम ही रास है। यह जीव ब्रह्म के साथ दिव्य मिलन का महोत्सव है। रुक्मणी जीव है। और श्री कृष्ण ब्रह्म दोनों का मिलन रुक्मणी मंगल है। आज वहीं कथा में सम्मिलित हुए पूर्व सांसद श्री ज्ञान सिंह जी, कथा श्रवण कर रसास्वादन किया और अपने जीवन कृतार्थ किया, और साथ में पूर्व मंडल अध्यक्ष श्री हरि हरसिंह एवं अन्य भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे, भागवत कथा के छठवें दिन धूमधाम से श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह है उत्सव मनाया , इस दौरान कथावाचक पंडित श्री कृपालु महाराज जी, ने कहा कि यह कोई साधारण विवाह नहीं था, बल्कि परमात्मा का विवाह है था परमात्मा प्रेम से मिलते हैं रुक्मणी मन ही मन परमात्मा के श्री चरणों से प्रेम करती थी, लेकिन रुक्मणी का बड़ा भाई ,रुक्मणी का विवाह शिशुपाल के साथ करना चाहता था। रुक्मणी कोई साधारण स्त्री नहीं, वह साक्षात लक्ष्मी का अवतार थीं, और जब रुक्मणी ने देखा कि भाई है पूर्वक विवाह शीशपाल के साथ करना चाहता है, जिससे मेरे पिता की इच्छा नहीं है, तो रुक्मणी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से परमात्मा श्री कृष्ण के पास इस संदेश को भेजा। इस संदेश मैं रुक्मणी ने कहा कि परमात्मा मैं जन्म -जन्मांतरों से आपके चरणों की दासी हूं। आप मुझ पर कृपा कर मुझे अपने चरणों में आश्रय देने की कृपा करें । जब यह संदेश परमात्मा श्री कृष्ण को प्राप्त हुआ, तो उन्होंने ब्राह्मण को सम्मान पूर्वक विदा कर स्वयं पीछे से कुंडलपुर के लिए चले, इधर रुक्मणी जी मन में विचार करती हैं, कि वह ब्राह्मण परमात्मा के पास मेरा संदेश लेकर पहुंचा अथवा नहीं, तभी उन्होंने देखा कि जिस ब्राह्मण को उन्होंने द्वारिका भेजा था वह ब्राह्मण लौट कर आ गया। रुक्मणी के पूछने पर उसने बताया परमात्मा श्री कृष्ण ने आपका संदेश सुन लिया है। और वह कुंडलपुर आ रहे हैं। कुछ ही समय के बाद श्री कृष्ण कुंडलपुर को आते हैं। रुक्मणी के पिता भीष्मक को यह बात पता चलती है तो उनकी प्रसन्नता का ठिकाना नहीं रहता है। वे बड़े प्रसन्न होते हैं। संगीत मय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन महारास प्रसंग एवं उद्धव संवाद व रुक्मणी विवाह के प्रसंग का सुन्दर वर्णन किया।इस अवसर पर कथा व्यास महराज जी ने रास पंच अध्याय का वर्णन करते हुए कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण है।। और उन्होंने कहा कि महारास मैं भगवान श्री कृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आवाहन किया, और महारास लीला द्वारा ही जीवात्मा का परमात्मा से मिलन हुआ, आज की कथा में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली, और इस तरह से कथा श्रवण कर श्रद्धालुओं ने भाव विभोर हो गए।