नीमच - (संजय जैन) क्षेत्र के विकास की जीवन रेखा मानी जाने वाली नीमच-सिंगोली-रावतभाटा-कोटा रेल लाइन अब फाइलों से निकलकर धरातल पर उतरने को तैयार है। हमारे चैनल द्वारा '47 साल का इंतज़ार, फाइलों में दफ़न नीमच-सिंगोली-कोटा रेल लाइन' शीर्षक से प्रसारित खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। इस खबर को संज्ञान में लेते हुए और सांसद सुधीर गुप्ता के निरंतर प्रयासों के चलते, रेल मंत्रालय ने इस 201 किलोमीटर लंबी परियोजना के लिए अंतिम (Final Location Survey) शुरू कर दिया है। दूरी घटेगी, उम्मीदें बढ़ेंगी वर्तमान में नीमच से कोटा जाने के लिए यात्रियों को चित्तौड़गढ़ होकर 230 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है। नई रेल लाइन बनने के बाद यह दूरी सिमटकर मात्र 140 किलोमीटर रह जाएगी। इस सीधी रेल सेवा से न केवल 90 किलोमीटर की बचत होगी, बल्कि मालवा और हाड़ौती क्षेत्र के बीच व्यापारिक और सामाजिक संबंध भी मजबूत होंगे। 325 गांवों और रावतभाटा को मिलेगी सौगात इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से क्षेत्र के 325 गांवों को सीधा फायदा मिलेगा। परियोजना की खास बात यह है कि यह लाइन रावतभाटा के समीप भैंसरोदगढ़ से होकर गुजरेगी, जिससे परमाणु ऊर्जा केंद्र के रूप में विख्यात रावतभाटा क्षेत्र पहली बार रेलवे मानचित्र से जुड़ सकेगा। प्रस्तावित मुख्य स्टेशन: जावद रोड ,रतनगढ़ ,सिंगोली भैंसरोदगढ़ , जवाहर सागर सर्वे का काम युद्ध स्तर पर जानकारी के मुताबिक, हैदराबाद की अरावी एसोसिएट्स कंपनी द्वारा ड्रोन सर्वे का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। अब सांसद सुधीर गुप्ता के सक्रिय हस्तक्षेप और रेलवे बोर्ड में लगातार फॉलोअप के बाद विस्तृत एलाइनमेंट सर्वे अंतिम चरण में है। अन्य प्रमुख रेल परियोजनाएं जो प्रगति पर हैं: नीमच-बड़ी सादड़ी (48 किमी): कार्य प्रगति पर। अजमेर-चंदेरिया दोहरीकरण (178 किमी): निर्माण जारी। मंदसौर-प्रतापगढ़-बांसवाड़ा (120 किमी): सर्वे जारी। दशकों पुराने इस प्रोजेक्ट को गति मिलने से क्षेत्र के निवासियों में उत्साह की लहर है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि सर्वे पूरा होते ही बजट आवंटन के साथ निर्माण कार्य भी शीघ्र शुरू होगा।