रामपुरा - ( मुकेश राठौर) नगर के सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन पूर्णाहुति एवं महाप्रसादी कार्यक्रम में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्री योगेन्द्र कुमार फरक्या (शिक्षक) की 41 वर्ष की शासकीय सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्ति के उपलक्ष्य में आयोजित इस धार्मिक आयोजन के समापन अवसर पर कथा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। अंतिम दिवस पर पूर्णाहुति यज्ञ, हवन, पूजा-अर्चना एवं महाआरती के दौरान पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया। वैदिक मंत्रोच्चार और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोषों से समूचा क्षेत्र गुंजायमान रहा। भागवत कथा के अंतिम दिन प्रसिद्ध भागवत आचार्य पंडित सोनू जी शास्त्री मौलकी वाले ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, भक्तों के प्रति उनकी करुणा, धर्म और मानव जीवन के आदर्श मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उनके प्रवचनों से श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और कथा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आयोजक परिवार द्वारा उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गई थीं। प्रचंड गर्मी को देखते हुए शीतल पेयजल, छायादार पंडाल, पंखों एवं बैठने की समुचित व्यवस्था की गई। महाप्रसादी वितरण के लिए भी सुव्यवस्थित प्रबंध किए गए, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। पूर्णाहुति के अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं आसपास के गांवों से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन के सफल संचालन में समाजजनों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजक परिवार ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगकर्ताओं एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सहयोग और भगवान की कृपा से यह धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समापन पर महाआरती एवं महाप्रसादी वितरण के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन हुआ।