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नन्हीं उम्र, महान संस्कार 3 वर्षीय बाल तपस्वी मेरू डूंगरवाल ने किया प्रथम आयंबिल तप

महिदपुर रोड - ( संजय जैन) त्याग और तपस्या की कोई आयु नहीं होती, यह सिद्ध कर दिखाया है मात्र 3 वर्ष के नन्हे बालक मेरू अचल डूंगरवाल ने। अबोल प्राणी करुणा दिवस के पावन अवसर पर मेरू ने भीषण गर्मी की परवाह किए बिना अपना प्रथम आयंबिल तप पूर्ण कर समाज के समक्ष सेवा, करुणा और धर्मनिष्ठा का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। जीव दया का अनूठा संदेश इस छोटी सी आयु में मेरू के मन में अबोल जीवों के प्रति उपजी करुणा, प्रेम और वात्सल्य की भावना ने सभी को भावविभोर कर दिया है। भूख और प्यास की चिंता किए बिना, बालक ने जिस श्रद्धा और अटूट आस्था के साथ यह तपस्या की है, वह न केवल उनके उज्जवल भविष्य का संकेत है, बल्कि यह हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। परिवार और समाज के लिए गौरव का क्षण बालक मेरू की इस भक्ति ने डूंगरवाल-कोचर परिवार के साथ-साथ पूरे समाज और नगर का मान बढ़ाया है। जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि मेरू के इन संस्कारों ने जिन शासन की शोभा में अभिवृद्धि की है। अनुमोदना और दान का पुण्य लाभ बालक की इस प्रथम तपस्या के निमित्त वर्धा जी खूबचंद डूंगरवाल परिवार (खाचरोद) द्वारा महिदपुर रोड सकल जैन श्री संघ के साधारण खाते में 11,111 रुपये की सम्मानजनक राशि भेंट की गई। इस अवसर पर सकल जैन श्री संघ के पदाधिकारियों और समाज के महानुभावों ने लाभार्थी परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बालक मेरू की खूब-खूब अनुमोदना की। प्रेरणा: यदि 3 वर्ष का नन्हा बालक तप मार्ग पर चलकर जीव दया का संकल्प ले सकता है, तो हम सभी को भी अपने जीवन में धर्म और करुणा के संस्कारों को आत्मसात करने की प्रेरणा लेनी चाहिए।

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